- उत्तराखंड की दुग्ध मूल्य प्रोत्साहन योजना के तहत दूध की गुणवत्ता के आधार पर प्रति लीटर 4 रुपये तक की सब्सिडी मिलती है।
- लगभग 53,000 डेयरी किसानों को इस योजना से फायदा हुआ है, जिसका बजट 444 करोड़ रुपये रखा गया है।
- सब्सिडी का भुगतान सीधे किसानों के बैंक खाते में किया जाता है और पंजीकरण सहकारी समितियों के जरिए होता है।
उत्तराखंड की Milk Price Incentive Scheme अपने डेयरी किसानों को प्रति लीटर दूध पर 4 रुपये तक की सब्सिडी देती है। यह योजना दूध की गुणवत्ता के आधार पर सब्सिडी देती है, जिससे राज्य के 53,000 से अधिक किसानों को सीधा आर्थिक फायदा मिलता है। यहां आप इस योजना के लाभ, सब्सिडी के नियम, भुगतान की प्रक्रिया, साथ ही अन्य राज्यों की योजनाओं से इसकी तुलना जानेंगे।
उत्तराखंड दुग्ध मूल्य प्रोत्साहन योजना का फायदा
उत्तराखंड सरकार की Milk Price Incentive Scheme ने डेयरी किसानों के लिए बड़ा मौका दिया है। इस योजना के तहत दूध की गुणवत्ता अगर 8 SNF या उससे ज्यादा हो तो किसानों को प्रति लीटर 4 रुपये की सब्सिडी मिलती है। जो दूध 7.50 से 7.99 SNF के बीच आता है, उसे 3 रुपये प्रति लीटर की सब्सिडी मिलती है। पूरे राज्य में लगभग 53,000 किसानों को जोड़ा गया है और इस योजना के लिए 444 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है। यह योजना दुग्ध उत्पादकों को प्रोत्साहित करने और दूध उत्पादन बढ़ाने में मदद कर रही है।
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सब्सिडी पाने के लिए जरूरी नियम और दूध की गुणवत्ता के मानक
सब्सिडी पाने के लिए दूध की गुणवत्ता मापनी जरूरी होती है। उत्तराखंड की योजना में अखिल भारतीय मानकों के अनुसार दूध का SNF (सॉलिड-नॉन-फैट) स्तर तय किया गया है।
- 8 या उससे ज्यादा SNF गुणवत्ता वाले दूध पर 4 रुपये प्रति लीटर की सब्सिडी।
- 7.50 से 7.99 SNF के बीच की गुणवत्ता वाले दूध पर 3 रुपये प्रति लीटर की सब्सिडी।
इसके अलावा, फायदा लेने वाले किसानों को राज्य की डेयरी सहकारी समितियों के साथ पंजीकरण कराना जरूरी है। केवल वही किसान जो सहकारी समितियों को दूध सप्लाई करते हैं, योजना के तहत सब्सिडी के हकदार होंगे।
पैसे का भुगतान और पंजीकरण की प्रक्रिया कैसे होती है
सब्सिडी सीधे किसानों के बैंक खातों में ट्रांसफर की जाती है। इसके लिए किसानों को अपनी पहचान और दूध आपूर्ति का प्रूफ सहकारी समितियों को देना होता है।
- किसान सहकारी समितियों में पंजीकरण कराएं।
- जो दूध वे रोज जमा करते हैं, उसके अनुसार सब्सिडी की रकम ऑनलाइन उनके बैंक खातों में भेजी जाती है।
- इस प्रक्रिया से नकद लेन-देन की जरूरत खत्म हो गई है, जिससे पारदर्शिता बढ़ी है।
उत्तराखंड में “गंगा गाय योजना” और “कामधेनु योजना” जैसे अन्य कार्यक्रम भी चल रहे हैं, जो डेयरी उद्योग को और प्रोत्साहन देते हैं।
उत्तराखंड की योजना की तुलना में अन्य राज्यों के मॉडल
उत्तराखंड जैसी योजना अन्य राज्यों में भी अपनाई जा रही है, खासकर असम और मध्य प्रदेश में। असम सरकार ने हाल ही में डेयरी किसानों को 5 रुपये प्रति लीटर की सब्सिडी देने की घोषणा की है, जो लगभग 20,000 किसानों को फायदा देगा।
मध्य प्रदेश की योजना में चुनौतियां और योजना की स्थिति
मध्य प्रदेश ने फरवरी 2024 में उत्तराखंड मॉडल पर आधारित योजना की घोषणा की थी। इस योजना के लिए 200 करोड़ रुपए का बजट रखा गया और 5 रुपये प्रति लीटर की सब्सिडी देने का लक्ष्य था। लेकिन, वित्त विभाग से मंजूरी मिलने के बाद भी अब तक योजना को लागू नहीं किया जा सका है। इसके पीछे कई प्रशासनिक और वित्तीय समस्याएं हैं।
उत्तराखंड की Milk Price Incentive Scheme डेयरी किसानों के लिए देश में एक उदाहरण बन चुकी है। अगर आप डेयरी व्यवसाय से जुड़े हैं तो इस योजना का फायदा उठाकर दूध उत्पादन बढ़ा सकते हैं और बेहतर आय पा सकते हैं। ज्यादा जानकारी और पंजीकरण के लिए सरकारी वेबसाइट पर जाएं।