- गौधाम योजना के तहत गोपालकों और पशु-परिचारकों को मासिक भुगतान दिया जाता है, जिससे उनकी आजीविका में सुधार होता है।
- योजना का फोकस पशुधन सुरक्षा, नस्ल सुधार और जैविक खेती व चारा विकास को बढ़ावा देने पर है।
- गौधाम सरकारी भूमि पर स्थापित किए जाते हैं और चारा उगाने के लिए सहायता दी जाती है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा और रोजगार के अवसर पैदा होते हैं।
छत्तीसगढ़ की गौधाम योजना पशुधन सुरक्षा को मजबूत करने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सहारा देने के उद्देश्य से शुरू की गई एक सरकारी पहल है। यह योजना गोपालकों, पशु-परिचारकों और ग्रामीण किसानों को वित्तीय सहायता प्रदान करती है और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को प्रोत्साहित करती है। नस्ल सुधार और जैविक खेती पर विशेष ध्यान के साथ, गौधाम योजना राज्य में ग्रामीण आजीविकाओं और गौ संरक्षण में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए तैयार है।
गौधाम योजना से किसे लाभ मिलेगा?
इस योजना का मुख्य लाभ उन गोपालकों, पशु-परिचारकों और ग्रामीण किसानों को मिलता है जो अपनी आय के लिए पशुधन पर निर्भर हैं। वित्तीय सहायता और अन्य सहयोग देकर, योजना सुनिश्चित करती है कि ये लोग पशुओं की देखभाल करते हुए नियमित आय प्राप्त करें और ग्रामीण विकास में भागीदारी बढ़े।
गौधाम योजना के तहत वित्तीय सहायता और प्रोत्साहन
गौधाम योजना के अंतर्गत गोपालकों को प्रति माह ₹10,916 और पशु-परिचारकों को ₹13,126 का मानदेय दिया जाता है। इसके अलावा चारे की लागत को कवर करने के लिए दैनिक भत्ता दिया जाता है। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले गौधामों को प्रति पशु दैनिक भुगतान वर्ष के अनुसार बढ़ते क्रम में दिया जाता है: प्रथम वर्ष ₹10, द्वितीय वर्ष ₹20, तृतीय वर्ष ₹30 और चतुर्थ वर्ष ₹35। यह भुगतान व्यवस्था बेहतर देखभाल और प्रबंधन को प्रोत्साहित करती है।
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पशुधन सुरक्षा और नस्ल गुणवत्ता कैसे सुधरेगी?
योजना का विशेष जोर अवैध परिवहन/तस्करी से बचाए गए तथा आवारा पशुओं की सुरक्षा पर है। राज्य में अवैध परिवहन पर प्रतिबंध के चलते अनेक पशु बचाए जाते हैं जिन्हें सुरक्षित आश्रय की आवश्यकता होती है। गौधामों में सुरक्षित बाड़बंदी, पानी और बिजली की समुचित व्यवस्था उपलब्ध कराई जाती है। नस्ल सुधार के प्रयासों का लक्ष्य दुग्ध उत्पादन बढ़ाना है, जिससे किसानों और डेयरी उद्योग—दोनों को लाभ होता है।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था और रोजगार में गौधामों की भूमिका
गौधाम जैविक खेती और चारा विकास को बढ़ावा देते हैं, जिससे गांवों में रोजगार के अवसर उत्पन्न होते हैं। गो-आधारित उद्योगों और टिकाऊ कृषि को समर्थन देकर, योजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करती है और स्थानीय समुदायों के लिए नए आय-स्रोत उपलब्ध कराती है।
गौधाम की स्थापना और संचालन
गौधाम केवल सरकारी भूमि पर जिला प्रशासन के प्रस्तावों के आधार पर स्थापित किए जाते हैं। प्रत्येक गौधाम की क्षमता उसके आकार के अनुसार लगभग 200 पशुओं तक हो सकती है। यदि पंजीकृत गौशाला समिति किसी गौधाम का संचालन करने से मना करती है, तो अन्य स्वैच्छिक संगठन—जैसे एनजीओ, ट्रस्ट, किसान उत्पादक कंपनियां या सहकारी समितियां—इसके प्रबंधन के लिए आवेदन कर सकती हैं। यह खुली व्यवस्था बेहतर संचालन और सामुदायिक भागीदारी सुनिश्चित करती है।
गौधाम योजना के तहत चारा विकास के लिए सहायता
पशुओं को समुचित पोषण मिले, इसके लिए गौधामों से सटी जमीन पर चारा उगाने हेतु वित्तीय सहायता दी जाती है। किसानों को प्रति एकड़ ₹47,000 की सहायता मिलती है, जबकि पांच एकड़ के लिए कुल ₹2,85,000 तक का प्रावधान है। यह सहयोग पशुधन के स्वास्थ्य को बनाए रखने और टिकाऊ चारा उत्पादन को बढ़ावा देता है।
पहलू | विवरण |
---|---|
गोपालक हेतु मासिक मानदेय | ₹10,916 |
पशु-परिचारक हेतु मासिक मानदेय | ₹13,126 |
प्रति पशु दैनिक भुगतान (वर्ष 1 से 4) | क्रमशः ₹10, ₹20, ₹30, ₹35 |
चारा विकास सहायता | प्रति एकड़ ₹47,000; 5 एकड़ के लिए ₹2,85,000 |
गौधाम क्षमता | प्रति गौधाम लगभग 200 पशु |
प्रबंधन हेतु पात्रता | पंजीकृत गौशाला समितियां, एनजीओ, ट्रस्ट, किसान उत्पादक कंपनियां, सहकारी समितियां |
आधिकारिक वेबसाइट | https://agriportal.cg.nic.in |
अधिक जानकारी और आवेदन की प्रक्रिया के लिए छत्तीसगढ़ के पशुधन विकास विभाग की आधिकारिक वेबसाइट https://agriportal.cg.nic.in पर जाएं।
गौधाम योजना के साथ आप पशुओं के लिए सुरक्षित आश्रय, बेहतर दुग्ध उत्पादन और गांवों में नई रोजगार संभावनाओं की उम्मीद कर सकते हैं। यह योजना छत्तीसगढ़ में टिकाऊ ग्रामीण विकास और पशुधन कल्याण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।