- प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत ₹6,450 करोड़ का बकाया विभिन्न राज्यों पर लंबित है, जिससे किसानों को समय पर मुआवजा नहीं मिल पा रहा।
- केंद्र सरकार ने खरीफ सीजन 2025-26 से एस्क्रो खाते में प्रीमियम जमा करना जरूरी कर 12% ब्याज लगाने के नियम लागू किए हैं ताकि भुगतान में देरी रोकी जा सके।
- फसल उपज का अनुमान लगाने में .यस-टेक तकनीक को कम से कम 50% वेटेज देने का निर्देश पारदर्शिता और सटीकता बढ़ाने के लिए दिया गया है।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना किसानों को प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान से बचाने वाली एक बहुत जरूरी योजना है। हाल ही में यह पता चला है कि केंद्र सरकार ने इस योजना के तहत बकाया भुगतान पर सख्त कदम उठाए हैं क्योंकि कई राज्यों में ₹6,450 करोड़ का भुगतान लंबित है। इस लेख में आप जानेंगे कि कौन से राज्य भुगतान में पीछे हैं, केंद्र सरकार ने क्या कदम उठाए हैं, और किसानों की योजना में बढ़ती भागीदारी के बारे में भी।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के भुगतान में देरी और बकाया राशियाँ
कृषि मंत्रालय के अनुसार वित्त वर्ष 2025 तक कई राज्यों ने बीमा दावों के भुगतान में देरी की है, जिससे किसानों को समय पर मुआवजा नहीं मिल पा रहा है। कुल लंबित राशि ₹6,450 करोड़ से ज्यादा है। यह स्थिति किसानों के लिए चिंता का विषय है क्योंकि फसलों के नुकसानों का तुरंत मुआवजा उनके जीवन और खेती को बचाने के लिए जरूरी होता है।
सबसे बड़े डिफॉल्टर राज्य और उनके बकायों का विवरण
भारत के कुछ राज्यों में भुगतान में सबसे ज्यादा देरी हुई है। नीचे दिए गए विवरण में प्रमुख डिफॉल्टर राज्यों और उनके बकाया राशियों की जानकारी दी गई है:
राज्य | बकाया राशि (₹ करोड़) |
---|---|
आंध्र प्रदेश | 2,565 |
राजस्थान | 1,525 |
मध्य प्रदेश | 1,468 |
तमिलनाडु | 124 |
उत्तर प्रदेश | 121 |
दावों के निपटारे में सुधार के लिए केंद्र सरकार के कड़े कदम
किसानों को समय पर मुआवजा दिलाने के लिए केंद्र ने कई नई नीतियां लागू की हैं। खरीफ सीजन 2025-26 से राज्यों के लिए यह जरूरी कर दिया गया है कि वे अपने हिस्से का बीमा प्रीमियम पहले से एस्क्रो खाते में जमा करें। साथ ही, बीमा कंपनियों को अगर दावों का भुगतान समय पर नहीं करते हैं तो उन्हें 12% ब्याज विभागीय नियम के अनुसार देना होगा। यह ब्याज राष्ट्रीय फसल बीमा पोर्टल पर अपने आप गणना हो जाएगा।
फसल उपज का सही आंकलन करने के लिए कृषि मंत्रालय ने कहा है कि तकनीक आधारित सिस्टम .यस-टेक से मिले आंकड़ों को कम से कम 50% वेटेज दिया जाए ताकि पारदर्शिता और सटीकता बढ़े।
तकनीक आधारित सिस्टम से पारदर्शिता और सटीकता
फसल उपज अनुमान में .यस-टेक तकनीक इस्तेमाल करके केंद्र सरकार ने योजना के काम में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए दिशा निर्देश दिए हैं। यह सिस्टम सुनिश्चित करेगा कि आंकड़े सही और भरोसेमंद हों, ताकि किसानों को उनका सही मुआवजा समय पर मिल सके।
किसानों की योजना में बढ़ती भागीदारी और लाभ
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में किसानों की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। वर्ष 2022-23 में 3.17 करोड़ किसान योजना से जुड़े थे, जो 2024-25 में बढ़कर 4.19 करोड़ हो गए हैं, जो 32% की अच्छी वृद्धि दर्शाती है। योजना से जुड़े किसानों में 6.5% किरायेदार, 17.6% सीमांत किसान और 48% ऋण लेने वाले किसान भी शामिल हैं।
अब तक किसानों को योजना के तहत कुल ₹1.78 लाख करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जा चुका है। इसके मुकाबले, किसानों ने कुल ₹35,666 करोड़ रुपये प्रीमियम के रूप में भरे हैं, जिससे साफ होता है कि हर ₹100 प्रीमियम पर किसानों को ₹500 का लाभ मिला है।
बीमा योजना की लाभकारी विशेषताएं और कवरेज
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना 100 से अधिक फसलों को कवर करती है और बाढ़, सूखा, चक्रवात, भूस्खलन, ओलावृष्टि जैसी प्राकृतिक आपदाओं से सुरक्षा देती है। यह योजना खेती के बाद की हानि को भी कवर करती है, जो किसानों के लिए बेहद जरूरी है।
बीमा कंपनियों की भूमिका और वित्तीय सहायता
इस योजना में 14 सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की बीमा कंपनियां सक्रिय रूप से काम कर रही हैं। केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2025 के लिए ₹15,864 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता दी है, जो इस बीमा सिस्टम को मजबूत बनाकर किसानों को समय पर राहत पहुंचाने में मदद करती है।
आप भी प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का फायदा उठाने के लिए अपने नजदीकी कृषि कार्यालय या आधिकारिक वेबसाइट https://pmfby.gov.in पर जाकर अधिक जानकारी ले सकते हैं। यह योजना आपके खेती के भविष्य को सुरक्षित बनाने में मदद करेगी।