- पीएम ‘आत्मनिर्भर निधि’ योजना मार्च 2030 तक बढ़ाई गई, ₹7,332 करोड़ का बजट तय।
- ऋण सीमा बढ़ाई गई; नए डिजिटल क्रेडिट और कैशबैक लाभ जोड़े गए।
- योजना का दायरा बढ़ाकर 1.15 करोड़ विक्रेताओं तक किया गया, जिनमें ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्र शामिल।
PM ‘आत्मनिर्भर निधि’ योजना, जिसे आधिकारिक रूप से प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि योजना कहा जाता है, अब 2030 तक बढ़ा दी गई है और इसमें और भी अच्छे लाभ जोड़े गए हैं। यह महत्वपूर्ण सरकारी योजना फुटपाथ और रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं की मदद के लिए बनाई गई है। इसके अंतर्गत सस्ती ब्याज दरों पर ऋण, डिजिटल लेनदेन पर इनाम और प्रशिक्षण सुविधाएं दी जाती हैं। ₹7,332 करोड़ के कुल बजट के साथ यह योजना अब 1.15 करोड़ लाभार्थियों को लक्षित करती है, जिनमें ग्रामीण और जनगणना नगर जैसे नए क्षेत्रों के विक्रेता भी शामिल हैं।
PM ‘आत्मनिर्भर निधि’ योजना के बढ़े हुए मुख्य लाभ
जानें इस योजना के अंतर्गत बढ़ी हुई ऋण सीमा, डिजिटल कैशबैक और विस्तृत कवरेज के बारे में।
बढ़ी हुई ऋण सीमा और डिजिटल इनाम
नए संस्करण में विक्रेताओं के व्यवसाय को बढ़ावा देने के लिए ऋण सीमा बढ़ा दी गई है। पहला ऋण अब ₹10,000 से बढ़ाकर ₹15,000 कर दिया गया है, वहीं दूसरा ऋण ₹20,000 से बढ़ाकर ₹25,000 कर दिया गया है। तीसरा ऋण ₹50,000 ही रहेगा। इसके अलावा, जो विक्रेता अपना दूसरा ऋण चुकाते हैं उन्हें यूपीआई से जुड़ा रुपे क्रेडिट कार्ड मिलेगा, जिससे उन्हें तुरंत क्रेडिट की सुविधा मिलेगी। डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए इस योजना में ₹1,600 तक का कैशबैक दिया जाता है, जिससे विक्रेता आधुनिक भुगतान विधियों का लाभ उठा सकें।
नए क्षेत्रों और अधिक लाभार्थियों तक विस्तार
पहले केवल शहरी क्षेत्रों तक सीमित यह योजना अब धीरे-धीरे जनगणना नगरों, अर्ध-शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में भी लागू हो रही है। इस विस्तार से लगभग 1.15 करोड़ रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं को लाभ मिलेगा, जिनमें 50 लाख नए लाभार्थी शामिल होंगे। इस व्यापक कवरेज से यह सुनिश्चित होगा कि देशभर के अधिक से अधिक विक्रेताओं को सुलभ ऋण और सहयोग सेवाएं मिल सकें, जिससे समावेशी विकास को बढ़ावा मिले।
विक्रेताओं के लिए प्रशिक्षण और सहयोग सेवाएं
वित्तीय सहायता के अलावा, योजना में व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम भी शामिल हैं। विक्रेताओं को व्यवसाय प्रबंधन, वित्तीय साक्षरता, डिजिटल कौशल और विपणन रणनीतियों पर मार्गदर्शन दिया जाता है। स्ट्रीट फूड विक्रेताओं को एफएसएसएआई (भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण) के साथ साझेदारी में स्वच्छता और खाद्य सुरक्षा का प्रशिक्षण भी दिया जाता है। ‘स्वनिधि से समृद्धि’ अभियान के तहत हर महीने जनकल्याण मेले आयोजित किए जाते हैं, जिनके माध्यम से विक्रेताओं और उनके परिवारों को अन्य सरकारी कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ा जाता है, जिससे उनकी समग्र भलाई सुनिश्चित हो।
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PM स्वनिधि योजना का प्रभाव और पहचान
उपलब्धियां, पुरस्कार और योजना की भूमिका विक्रेताओं तथा स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में।
लाभार्थियों और डिजिटल लेनदेन के आँकड़े
30 जुलाई 2025 तक इस योजना ने बड़ा प्रभाव डाला है:
पैरामीटर | आँकड़े |
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लाभान्वित स्ट्रीट वेंडर्स | 68 लाख |
वितरित ऋण | 96 लाख ऋण, मूल्य ₹13,797 करोड़ |
डिजिटल लेनदेन का मूल्य | ₹6.09 लाख करोड़ |
विक्रेताओं द्वारा अर्जित कैशबैक | ₹241 करोड़ |
कल्याणकारी योजनाओं से जुड़े लाभार्थी | 46 लाख |
पुरस्कार और भविष्य की योजनाएं
PM स्वनिधि योजना को उसके प्रभाव के लिए व्यापक सराहना मिली है। इसे 2023 में प्रधानमंत्री पुरस्कार और 2022 में डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन के लिए सिल्वर अवार्ड प्राप्त हुआ। ये पुरस्कार इस योजना की सफलता को दर्शाते हैं, जिसने आजीविका सुधारने, डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में अहम योगदान दिया है।
आगे भी यह योजना स्ट्रीट वेंडर्स को आसान ऋण, डिजिटल साधन और कौशल विकास उपलब्ध कराती रहेगी। इससे विक्रेताओं को अपना व्यवसाय बढ़ाने, जीवन स्तर सुधारने और जीवंत, आत्मनिर्भर शहरी एवं ग्रामीण समुदाय बनाने में मदद मिलेगी।
अधिक जानकारी के लिए आप आधिकारिक सरकारी वेबसाइट पर जा सकते हैं: https://pmsvanidhi.mohua.gov.in/