- केंद्रीय मंत्रिमंडल ने प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना को मंजूरी दी, जिसकी वार्षिक बजट राशि ₹24,000 करोड़ है और यह योजना अक्टूबर 2025 से छह वर्षों तक चलेगी।
- यह योजना 100 जिलों को चुना गया है और लगभग 1.7 करोड़ किसानों को फसल उत्पादन बढ़ाने और सतत कृषि को बढ़ावा देने में सहायता करेगी।
- इस योजना को 36 मौजूदा योजनाओं के एकीकरण, 117 प्रमुख संकेतकों के माध्यम से निगरानी और प्रशिक्षण व ऋण सहायता के जरिए लागू किया जाएगा।
प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने कृषि उत्पादन बढ़ाने और सतत कृषि को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से मंजूरी दी है। ₹24,000 करोड़ के वार्षिक बजट के साथ यह विस्तृत योजना अक्टूबर 2025 से शुरू होकर 100 चयनित जिलों और लगभग 1.7 करोड़ किसानों को लक्षित करेगी।
प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना: मुख्य विशेषताएं और लक्ष्य
यह नई योजना फसल उत्पादन में महत्वपूर्ण वृद्धि के साथ-साथ फसल विविधीकरण और सतत खेती के तरीकों को बढ़ावा देने का लक्ष्य रखती है। यह जिलों और राज्यों के बीच उत्पादकता की खाई को कम करने के लिए सर्वोत्तम तरीकों, बुनियादी ढांचे, सिंचाई और ऋण उपलब्धता में सुधार को प्रोत्साहित करेगी।
लक्षित जिले और किसान
100 जिलों का चयन तीन प्रमुख मानदंडों के आधार पर किया गया है: कम उत्पादकता, कम फसल गहनता और कम ऋण वितरण। प्रत्येक राज्य से कम से कम एक जिला शामिल किया गया है, जो शुद्ध फसल क्षेत्र और परिचालन भूमि के आधार पर तय किया गया है। इन जिलों के लगभग 1.7 करोड़ किसान सीधे लाभान्वित होंगे।
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वित्तीय बजट और कार्यान्वयन अवधि
इस योजना के लिए ₹24,000 करोड़ का वार्षिक बजट तय किया गया है, जिसे अक्टूबर 2025 से शुरू होकर छह वर्षों तक खर्च किया जाएगा। कार्यान्वयन रबी फसल चक्र की शुरुआत के साथ होगा, जिससे इसे मौजूदा कृषि चक्र के साथ आसानी से जोड़ा जा सके।
36 योजनाओं का एकीकृत दृष्टिकोण
यह योजना 11 सरकारी विभागों की 36 मौजूदा योजनाओं, राज्य योजनाओं और निजी भागीदारी के साथ स्थानीय स्तर की भागीदारी को एकीकृत करके कार्यान्वित की जाएगी। इससे संसाधनों का बेहतर उपयोग और किसानों को व्यापक सहायता सुनिश्चित की जाएगी।
कार्यान्वयन योजना: समितियाँ और निगरानी
सुनियोजित योजना और निष्पादन सुनिश्चित करने के लिए जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर समितियाँ गठित की जाएंगी। “जिला धन-धान्य समितियाँ”, जिनमें प्रगतिशील किसान भी शामिल होंगे, प्रत्येक जिले के लिए कृषि और संबद्ध गतिविधियों की योजना बनाएंगी। प्रगति की मासिक निगरानी 117 प्रमुख संकेतकों के माध्यम से एक डिजिटल डैशबोर्ड पर की जाएगी।
नीति आयोग और केंद्रीय नोडल अधिकारी नियमित रूप से इन योजनाओं की समीक्षा करेंगे, जिससे पारदर्शिता और उत्तरदायित्व सुनिश्चित किया जा सके।
किसानों को समर्थन: प्रशिक्षण, ऋण और सतत कृषि
किसानों को तैयार करने के लिए अगस्त 2025 से प्रशिक्षण और जागरूकता अभियान शुरू होंगे। योजना अल्पकालिक और दीर्घकालिक ऋण की उपलब्धता में सुधार के साथ-साथ फसल विविधीकरण, जल और मिट्टी संरक्षण, जैविक खेती को बढ़ावा देने और पंचायत और ब्लॉक स्तर पर भंडारण सुविधाओं को मजबूत करने पर केंद्रित है।
अपेक्षित परिणाम: उत्पादकता और ग्रामीण विकास में वृद्धि
प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना से कृषि उत्पादन में भारी वृद्धि और ग्रामीण आजीविका में सुधार की अपेक्षा की जाती है। मूल्य संवर्धन और बुनियादी ढांचे में सुधार भारत को खाद्यान्न आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में मदद करेगा, जिससे “आत्मनिर्भर भारत” के सपने को मजबूती मिलेगी।
विशेषज्ञों की राय और भारतीय कृषि का भविष्य
महिंद्रा ग्रुप के ग्रुप सीईओ और एमडी अनीश शाह जैसे विशेषज्ञों ने योजना का स्वागत करते हुए इसे ग्रामीण समृद्धि, सतत कृषि और फसल विविधीकरण को प्रोत्साहित करने का एक बड़ा अवसर बताया है। ऐसी योजनाएँ भारतीय कृषि को मजबूत और समृद्ध बनाने की नींव रखती हैं।
यह योजना भारत की कृषि को अधिक उत्पादक, सतत और भविष्य के लिए तैयार बनाने की दिशा में सरकार का एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे किसानों को और अन्य हितधारकों को बेहतर समर्थन और संसाधन मिलेंगे, जो हमारे राष्ट्रीय विकास लक्ष्यों से मेल खाते हैं।
योजना का नाम | प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना |
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वार्षिक बजट | ₹24,000 करोड़ |
अवधि | 6 वर्ष (अक्टूबर 2025 से 2031 तक) |
कवर किए गए जिले | 100 जिले |
लाभार्थी किसान | लगभग 1.7 करोड़ किसान |
प्रशिक्षण अभियान शुरू | अगस्त 2025 |
प्रदर्शन संकेतक | 117 प्रमुख प्रदर्शन संकेतक |
शासी निकाय | जिला, राज्य और राष्ट्रीय समितियाँ + नीति आयोग निगरानी |
आधिकारिक वेबसाइट | https://agriwelfare.gov.in/ |
अधिक जानकारी और अपडेट के लिए, किसान और अन्य लोग ऊपर दी गई कृषि मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट पर जा सकते हैं।